उत्तराखंड के सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को तदर्थ बोनस का रास्ता साफ
- वित्तीय स्थिति का आकलन कर निगम और सार्वजनिक उपक्रम स्वयं ले सकेंगे।
- वित्त विभाग की अलग से अनुमति नहीं होगी जरूरी।
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए तदर्थ बोनस देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सार्वजनिक उपक्रम और निगम अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन कर निर्धारित शर्तों के तहत कर्मचारियों को बोनस देने का निर्णय अपने स्तर पर ले सकेंगे। इसके लिए वित्त विभाग से अलग से सहमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
औद्योगिक विकास अनुभाग-2 के सचिव विनय शंकर पांडेय ने बुधवार को इस संबंध में सभी सार्वजनिक उपक्रमों एवं निगमों से जुड़े प्रशासनिक विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यह निर्णय वित्त विभाग की ओर से दो नवंबर को जारी शासनादेश के क्रम में लिया गया है। शासनादेश में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों सहित अन्य पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादकता असंबद्ध बोनस, यानी तदर्थ बोनस देने की व्यवस्था की गई है।
अपने संसाधनों से उठाना होगा बोनस का भार
नई व्यवस्था के तहत जिन सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में बोनस की देयता बनती है और जो अपने संसाधनों से इसका वित्तीय भार उठाने में सक्षम हैं, वे निर्धारित शर्तों के अधीन पात्र कर्मचारियों को तदर्थ बोनस दे सकेंगे।
सचिव विनय शंकर पांडेय ने प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों की वित्तीय स्थिति का आकलन करें। वित्तीय रूप से सक्षम संस्थानों में शासनादेश की शर्तों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को बोनस अनुमन्य करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक उद्यम विभाग को उपलब्ध कराना भी आवश्यक होगा।
किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
शासनादेश के अनुसार समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के साथ ही समूह ‘ख’ के अराजपत्रित कर्मचारी तदर्थ बोनस के पात्र होंगे। इसके लिए ग्रेड वेतन की अधिकतम सीमा 4800 रुपये अथवा पुनरीक्षित वेतनमान में लेवल-8 तक निर्धारित की गई है।
हालांकि बोनस का लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जो किसी उत्पादकता आधारित बोनस योजना के दायरे में नहीं आते हैं। बोनस की गणना केंद्र सरकार के प्रावधानों के अनुरूप अधिकतम 30 दिन की परिलब्धियों और 7,000 रुपये की गणना सीमा के आधार पर की जाएगी। वास्तविक भुगतान कर्मचारी की पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुसार होगा।
छह माह की सेवा पूरी करना जरूरी
तदर्थ बोनस का लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जो 31 मार्च 2026 को सेवा में कार्यरत थे और इस तिथि तक कम से कम छह माह की निरंतर एवं संतोषजनक सेवा पूरी कर चुके हों। ऐसे कर्मचारी जिन्होंने पूरे वर्ष की सेवा पूरी नहीं की है, लेकिन छह माह या उससे अधिक समय तक कार्य किया है, उन्हें उनकी सेवा अवधि के अनुपात में बोनस दिया जाएगा।
दैनिक वेतनभोगियों के लिए भी प्रावधान
शासनादेश में कैजुअल और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे कर्मचारी जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में छह कार्यदिवसीय कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन अथवा पांच कार्यदिवसीय कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 206 दिन कार्य किया है, वे भी निर्धारित शर्तों के तहत बोनस के पात्र होंगे।
इन कर्मचारियों के लिए अधिकतम 1200 रुपये की मासिक परिलब्धि के आधार पर 30 दिनों का तदर्थ बोनस 1184 रुपये निर्धारित किया गया है।
विभागीय और आपराधिक मामलों में लागू होंगी शर्तें
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमा लंबित है, उनका बोनस भुगतान मामले के अंतिम परिणाम तक स्थगित रखा जाएगा।
यदि संबंधित कर्मचारी दोषमुक्त होता है तो उसे नियमानुसार बोनस का लाभ मिल सकेगा। वहीं वर्ष 2025-26 के दौरान विभागीय कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे में दंडित पाए गए कर्मचारियों को तदर्थ बोनस नहीं दिया जाएगा।
अवैतनिक अवकाश को छोड़कर अन्य प्रकार के अवकाश की अवधि को पात्रता की गणना में शामिल किया जाएगा। निलंबित कर्मचारियों के मामले में भी शासनादेश की निर्धारित शर्तें लागू होंगी।
लाभ की स्थिति में स्थानीय निकाय भी दे सकेंगे बोनस
शासनादेश के अनुसार स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरण भी, यदि वे वित्तीय रूप से सक्षम और लाभ की स्थिति में हैं, अपने कर्मचारियों को बोनस दे सकते हैं। हालांकि इसका पूरा वित्तीय भार संबंधित संस्थान को अपने संसाधनों से ही वहन करना होगा।
सरकार की ओर से बोनस भुगतान के लिए कोई अतिरिक्त अनुदान उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
नकद होगा बोनस का भुगतान
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुमन्य तदर्थ बोनस का भुगतान कर्मचारियों को नकद धनराशि के रूप में किया जाएगा। बोनस की राशि का लेखांकन संबंधित कर्मचारियों के वेतन व्यय वाले लेखाशीर्षक में मानक मद ‘वेतन’ के अंतर्गत किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले के बाद सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत पात्र कर्मचारियों को बोनस मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अब अंतिम निर्णय संबंधित संस्थानों की वित्तीय स्थिति और शासनादेश में निर्धारित पात्रता की शर्तों के आधार पर लिया जाएगा।
कर्मचारी महासंघ ने जताया आभार
राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों के कर्मचारियों को तदर्थ बोनस देने की दिशा में सरकार की पहल का स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इसे निगम कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से कर्मचारी बोनस की उम्मीद लगाए हुए थे। सरकार द्वारा निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों को अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर बोनस देने का निर्णय लेने का अधिकार दिए जाने से कर्मचारियों के लिए सकारात्मक रास्ता खुला है।
रणाकोटी ने सचिव विनय शंकर पांडेय का भी आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि सभी वित्तीय रूप से सक्षम निगम और सार्वजनिक उपक्रम जल्द अपने संसाधनों का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को तदर्थ बोनस का लाभ देंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

