केदारनाथ धाम की पवित्र रूप छड़ को लेकर गहराय विवाद, सरकार ने दिए जांच के आदेश, बीकेटीसी मौन?
देहरादून: केदारनाथ धाम के अत्यंत पवित्र धार्मिक प्रतीक रूप छड़ (जिसे धर्म दंड भी कहा जाता है) के गायब होने से हड़कंप मच गया है। यह चांदी का बेशकीमती प्रतीक बाबा केदारनाथ का स्वरूप माना जाता है और इसका दर्शन केदारनाथ के दर्शन के समान पुण्यदायी होता है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की जिम्मेदारी है कि ऐसे सभी प्रतीकों को सुरक्षित रखे, लेकिन हाल ही में भंडार गृह में यह नहीं मिलने पर मामला सुर्खियों में आ गया।
धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने इस लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई और जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा, “धर्म दंड बेहद महत्वपूर्ण है। इसे इस तरह गायब नहीं होना चाहिए। यह कहीं बाहर नहीं ले जाया जा सकता। पूरी पड़ताल होगी कि यह कहां गया और कैसे गया।”
जानकारी के अनुसार, केदारनाथ के मुख्य रावल भीमाशंकर लिंग ने महाराष्ट्र के नांदेड़ में पट्टा अभिषेक रजत महोत्सव में भाग लेने के लिए 21 जनवरी 2026 को रूप छड़ को वहां ले जाने की अनुमति ली थी। बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय थपलियाल ने 19 जनवरी 2026 को ही यह अनुमति प्रदान कर दी थी। इसके बाद रूप छड़ महाराष्ट्र पहुंचा, लेकिन बीकेटीसी के खजाने में वापस नहीं लौटा, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
पंडा-पुरोहितों और जानकारों का कहना है कि यह रावल का निजी कार्यक्रम था। केदारनाथ के धार्मिक प्रतीकों को किसी अन्य स्थान या प्रयोजन के लिए ले जाना परंपरा के विरुद्ध है। कपाट बंद होने के बाद सभी प्रतीक बीकेटीसी के खजाने में सुरक्षित रखे जाते हैं और इन्हें बाहर नहीं ले जाया जा सकता। साल 2000 में भी रावल द्वारा दक्षिण भारत ले जाने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन तब बीकेटीसी ने स्पष्ट रूप से मना कर दिया था, यह कहते हुए कि ऐसी कोई परंपरा या दस्तूर नहीं है।
केदारनाथ के पुरोहित प्रवीन तिवारी ने बताया, “रूप छड़ महाराष्ट्र ले जाने की जानकारी बीकेटीसी को थी, लेकिन अब यह उत्तराखंड वापस आ चुका है और सुरक्षित है। गुम या चोरी होने की कोई बात नहीं। हालांकि, बिना उचित प्रक्रिया के इसे ले जाना उचित नहीं था।”
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और सीईओ विजय थपलियाल ने मामले पर चुप्पी साध रखी है। मीडिया से संपर्क करने की कई कोशिशों के बावजूद कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि चारधामों में धार्मिक प्रतीकों के साथ छेड़छाड़ की कोई परंपरा नहीं है। अनुमति किसने और क्यों दी? बीकेटीसी की चुप्पी से साफ है कि समिति में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
