उत्तराखंड : आयुर्वेदिक चिकित्सकों का सांकेतिक विरोध, काली पट्टी बांधकर जताया रोष

उत्तरकाशी। प्रदेशभर के साथ ही जनपद उत्तरकाशी में सरकारी आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सकों ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों के समर्थन में कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। चिकित्सकों ने नियमित रूप से मरीजों का उपचार जारी रखते हुए सरकार और विभागीय अधिकारियों तक अपनी समस्याएं पहुंचाने का प्रयास किया।

राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ शाखा उत्तरकाशी की ओर से आयोजित ऑनलाइन बैठक में चिकित्सकों ने विभागीय नीतियों और लंबित मांगों को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया। बैठक में निदेशालय द्वारा 30 मई 2026 को जारी उस आदेश पर भी नाराजगी जताई गई, जिसमें जून माह से वेतन आहरण को बायोमेट्रिक एवं मोबाइल एप आधारित उपस्थिति प्रणाली से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सकों ने कहा कि विभाग में कई महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित पड़े हैं। इनमें आयुर्वेदिक संवर्ग के लिए निदेशक पद पर नियुक्ति न होना, डीएसीपी एवं एसीपी संबंधी मांगों का समाधान न होना, वर्ष 2024 बैच के चिकित्साधिकारियों का स्थायीकरण लंबित रहना, चिकित्सालयों में निम्न गुणवत्ता की औषधियों की आपूर्ति, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत चिकित्सकों से एक ही प्रकार की सूचनाएं बार-बार ऑनलाइन मांगे जाना तथा प्रशिक्षण मद में कई वर्षों से टीए/डीए बिलों का भुगतान न होना प्रमुख हैं।

इसके अतिरिक्त चिकित्सकों ने आउटरिच कैंप संचालन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध न कराने और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत चिकित्साधिकारियों को सीएचओ जैसे पदनाम दिए जाने पर भी आपत्ति जताई।

चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना महामारी से लेकर चारधाम यात्रा तक हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

बैठक में जिला उत्तरकाशी के सभी चिकित्साधिकारियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि मांगों के समाधान तक वे प्रदेशव्यापी सामूहिक एवं चरणबद्ध आंदोलनात्मक कार्यक्रमों में राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड का पूर्ण समर्थन करेंगे।

हालांकि विरोध प्रदर्शन के दौरान जिले के सभी आयुर्वेदिक चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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