लंबित ई-चालान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वाहन जब्ती से लेकर RC और PUC सेवाओं पर रोक के निर्देश
नई दिल्ली। लंबे समय से ट्रैफिक ई-चालान का भुगतान नहीं करने वाले वाहन मालिकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लंबित ई-चालान की प्रभावी वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल ई-चालान जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बकाया जुर्माने की वसूली के लिए जमीन पर ठोस कार्रवाई भी होनी चाहिए।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पुराने लंबित चालानों वाले वाहनों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने सड़कों पर रैंडम चेकिंग बढ़ाने और बकाया ई-चालान मिलने पर संबंधित वाहन को जब्त करने के निर्देश दिए हैं।
RC से जुड़ी ऑनलाइन सेवाएं भी हो सकती हैं फ्रीज
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, जिन वाहनों पर लंबे समय से ई-चालान लंबित हैं, उनके लिए परिवहन विभाग की कई ऑनलाइन सेवाओं को रोका जा सकता है। जब तक बकाया जुर्माना जमा नहीं होता, तब तक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के नवीनीकरण, डुप्लीकेट RC जारी करने और वाहन के पते में बदलाव जैसी सेवाओं पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
फिटनेस सर्टिफिकेट और वाहन ट्रांसफर पर भी रोक
कोर्ट ने लंबित चालान वाले वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। बकाया चालान पूरी तरह चुकता होने तक ऐसे वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं करने की बात कही गई है। इसके साथ ही वाहन को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है, जिससे उसके स्वामित्व हस्तांतरण और बिक्री जैसी प्रक्रियाओं पर भी रोक लग सके।
PUC और ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी कार्रवाई की बात कही है। ऐसे मामलों में लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक अथवा मौजूदा लाइसेंस के निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा लंबित चालान वाले वाहनों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जारी करने पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
49 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ई-चालान बकाया
सुनवाई के दौरान देशभर में लंबित ई-चालानों की बड़ी संख्या और बकाया राशि का मुद्दा भी सामने आया। एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ई-चालान के जरिए करीब 49,194 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जानी है। इनमें से करीब 26,175 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। इससे बड़ी राशि अब भी लंबित है।
2012 की जनहित याचिका से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2012 में दायर की गई एक जनहित याचिका से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की लंबे समय से निगरानी कर रहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों से मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमीनी स्तर पर प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
वाहन मालिकों के लिए क्या मायने?
यदि किसी वाहन पर पुराना ई-चालान लंबित है, तो संबंधित वाहन मालिक को बकाया राशि की स्थिति जांचकर उसका भुगतान करना जरूरी होगा। कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में परिवहन और पुलिस विभागों द्वारा लंबित चालानों पर कार्रवाई बढ़ाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में वाहन जब्ती के साथ-साथ RC, फिटनेस, PUC, वाहन ट्रांसफर और कुछ मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
