पांच साल की उम्र से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में जुटा गोलू, सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के लिए बना प्रेरणा
बागेश्वर। उम्र महज आठ वर्ष, कक्षा दूसरी का छात्र और जुनून पर्यावरण बचाने का। जहां आज के दौर में बच्चे मोबाइल, वीडियो गेम और मनोरंजन में अपना अधिकांश समय बिताते नजर आते हैं, वहीं उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के एक नन्हे छात्र ने प्रकृति संरक्षण को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय मजकोट में अध्ययनरत गोलू पुरी पिछले करीब दो वर्षों से लगातार पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
ग्राम मजकोट निवासी गोलू पुरी को सोशल मीडिया पर ‘एनवायरमेंट हीरो’ के नाम से पहचान मिली है। महज पांच वर्ष की उम्र से ही पर्यावरण के प्रति उनका लगाव दिखाई देने लगा था। बीते दो वर्षों में उन्होंने लगातार पौधे लगाने के साथ-साथ लगाए गए पौधों की देखभाल करने और आसपास के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का काम किया है।
पौधा लगाना ही नहीं, उसकी जिम्मेदारी भी उठाते हैं गोलू
गोलू का पर्यावरण प्रेम केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है। वह पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल भी करते हैं। लोगों को पेड़-पौधों के महत्व के बारे में बताते हैं और अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके छोटे-छोटे प्रयासों के वीडियो और गतिविधियां सोशल मीडिया पर भी लोगों तक पहुंच रही हैं, जहां उन्हें व्यापक सराहना मिल रही है। गोलू का संदेश बेहद सरल है कि पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं और प्रकृति को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उम्र छोटी, सोच बड़ी
गोलू पुरी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि सोच और इच्छाशक्ति जरूरी होती है। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद और मोबाइल की दुनिया में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में गोलू प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझ रहे हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।
उनकी पर्यावरण संरक्षण की मुहिम न केवल उत्तराखंड बल्कि देशभर के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। गोलू का प्रयास यह संदेश देता है कि यदि छोटी उम्र में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित पर्यावरण तैयार किया जा सकता है।
एक नन्हा कदम, लेकिन संदेश बड़ा—पेड़ बचेंगे तो भविष्य बचेगा।
