रवांल्टी भाषा में अनूदित पुस्तक ‘बडऽ घरऽ कि निनैई’ का लोकार्पण, प्रेमचंद की कहानियों को लोकभाषा का यशवंत पंवार ने किया अनुवाद 

  •  प्रेमचंद की कहानियों को लोकभाषा में पहुंचाने का प्रयास, साहित्यकारों ने लेखक यशवंत पंवार के प्रयास को सराहा।

बड़कोट (उत्तरकाशी)। विश्व प्रसिद्ध यमुना नदी की घाटी और रवांई क्षेत्र की लोकभाषा एवं संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत उभरते लेखक यशवंत सिंह पंवार ‘यश’ की रवांल्टी भाषा में अनूदित पुस्तक ‘बडऽ घरऽ कि निनैई’ का लोकार्पण राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज बड़कोट के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के साहित्यकारों, शिक्षकों और गणमान्य लोगों ने पुस्तक का विमोचन करते हुए लेखक के प्रयास की सराहना की।

कार्यक्रम में उत्तराखंड गौरव सम्मान से सम्मानित प्रतिष्ठित साहित्यकार महावीर रवांल्टा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि, जिला अध्यक्ष राजकीय शिक्षक संघ उत्तरकाशी अवतार सिंह चौहान अति विशिष्ट अतिथि तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज राई कार्यक्रम के अध्यक्ष रहे। पुस्तक की समीक्षा लोक साहित्यकार अनोज बनाली ने प्रस्तुत की।

प्रेमचंद की कहानियों को रवांल्टी में पहुंचाने का प्रयास

मुख्य अतिथि महावीर रवांल्टा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियां समाज के विभिन्न वर्गों की संवेदनाओं, संघर्षों और जीवन की वास्तविकताओं को सामने रखती हैं। यशवंत सिंह पंवार ने प्रेमचंद की इन यथार्थवादी कहानियों का रवांल्टी भाषा में रूपांतरण कर सराहनीय कार्य किया है। इससे नई पीढ़ी अपनी लोकभाषा से जुड़ सकेगी और प्रेमचंद के साहित्य को अपनी मिट्टी और अपनी बोली में समझ पाएगी। उन्होंने कहा कि लोकभाषाओं का संरक्षण केवल साहित्यिक कार्य नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने का माध्यम भी है।

‘भाषा हमारी पहचान और जड़ों की संवाहक’

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, जड़ों और संस्कृति की संवाहक होती है। रवांल्टी भाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में ‘बडऽ घरऽ कि निनैई’ जैसी पुस्तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जिला अध्यक्ष राजकीय शिक्षक संघ उत्तरकाशी अवतार सिंह चौहान ने यशवंत पंवार के माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सेवाकाल को याद करते हुए उनके दृढ़ संकल्प और रचनात्मक प्रयास की सराहना की। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन के लिए लेखक को बधाई दी।

‘भाषा और संस्कृति का संरक्षण भी राष्ट्र सेवा’

पुस्तक के अनुवादक एवं लेखक यशवंत सिंह पंवार ‘यश’ ने पुस्तक की रचना यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा केवल सीमा पर तैनात रहकर ही नहीं, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से भी की जा सकती है। उन्होंने रवांल्टी भाषा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम का संचालन शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार ध्यान सिंह रावत ‘ध्यानी’ ने किया। उन्होंने रवांल्टी लोकभाषा, संस्कृति और इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जबकि समापन प्रधानाचार्य मनोज राई ने किया।

इस अवसर पर अरविंद पंवार, डॉ. आशीष नौटियाल, डॉ. पूजा चौहान, रमेश पंवार, जनक रावत, आशीष रमोला, अतोल रावत, रणवीर सिंह रावत, जयप्रकाश रावत, अनिल पयाल, रूपेंद्र रावत, अरविंद रावत, दिनेश चौहान, किशन रावत, निर्मल नौटियाल, रविंद्र रावत, संजय रावत, जगमोहन रावत, आशीष पंवार, तरवीन राणा, नवीन जगुड़ी, गोपाल राणा, विकास पंवार, रोहित रावत, हरीश पंवार सहित अनेक साहित्यप्रेमी, शिक्षक और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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