‘रवांई : लोकसंस्कृति एवं पर्यटन’ का विमोचन, वक्ताओं ने बताया क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का दस्तावेज

बड़कोट। नगर पालिका परिषद बड़कोट में रविवार को शिक्षक एवं साहित्यकार ध्यान सिंह रावत “ध्यानी” द्वारा लिखित पुस्तक ‘रवांई : लोक संस्कृति एवं पर्यटन’ का भव्य लोकार्पण किया गया। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में अजीज प्रेम जी फाउंडेशन का विशेष सहयोग रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने पुस्तक को रवांई क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत है। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए इस प्रकार के प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

पुस्तक की समीक्षा करते हुए खजान चौहान ने कहा कि पुस्तक में उन सभी विषयों को गंभीरता से शामिल किया गया है, जिन्हें सामने लाना समय की आवश्यकता थी। उन्होंने पुस्तक की विषयवस्तु को शोधपरक और उपयोगी बताते हुए कहा कि यह रवांई क्षेत्र की संस्कृति, समाज और पर्यटन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।

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कार्यक्रम में मौजूद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य डॉ. सुबोध बिष्ट ने पुस्तक को युवाओं और शोधार्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि स्थानीय इतिहास और संस्कृति पर आधारित साहित्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लोकसंस्कृति संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगर पालिका अध्यक्ष विनोद डोभाल ने कहा कि इस तरह की रचनात्मक पहल समाज को नई दिशा और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। उन्होंने पुस्तक को क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

पुस्तक के लेखक ध्यान सिंह रावत ‘ध्यानी’ ने अपने लेखन सफर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि पुस्तक तैयार करने के लिए उन्होंने रवांई घाटी के लगभग पूरे क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद किया और अनेक संस्मरणों को पुस्तक में स्थान दिया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य रवांई की संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाना है।

कार्यक्रम के दौरान यह भी चर्चा हुई कि पुस्तक को विद्यालयों में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि छात्र-छात्राएं अपने क्षेत्र की संस्कृति और विरासत से परिचित हो सकें। लेखक ने पुस्तक को कम कीमत पर उपलब्ध कराने की बात भी कही।

पुस्तक में रवांई क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन और पर्यटन स्थलों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें सरनौल, मोरी, पुरोला, नौगांव, बड़कोट, हनोल, हरकीदून, रूपिन घाटी, दयारा बुग्याल, नचिकेता ताल और यमुनोत्री धाम सहित कई प्रसिद्ध और अल्पज्ञात स्थलों की जानकारी दी गई है। पुस्तक केवल पर्यटन स्थलों का परिचय नहीं कराती, बल्कि वहां के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

इसके अलावा पुस्तक में लोकपर्वों, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, आभूषण, पशुपालन, वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ शामिल किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को समझने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए संग्रहणीय और प्रेरणादायी साबित होगी।

पुस्तक के प्रकाशक हिमांतर प्रकाशन के शशि मोहन रवांल्टा ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य क्षेत्रीय रचनाकारों को एक मजबूत मंच उपलब्ध कराना है और हिमांतर प्रकाशन इसी दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रकाशन संस्था लंबे समय से उत्तराखंड की लोक संस्कृति और साहित्य के संरक्षण के लिए समर्पित है।

क्षेत्रीय लोकसाहित्य और लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने वाली पुस्तकों का प्रकाशन वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने भविष्य में भी उत्तराखंड की संस्कृति और साहित्य से जुड़ी महत्वपूर्ण कृतियों को प्रकाशित करने का भरोसा दिलाया।

इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुपमा रावत, प्रहलाद रावत, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक रुकम सिंह रावत, विजेंद्र विश्वकर्मा, प्रताप राणा, विनोद असवाल, चरण सिंह रावत, जनक सिंह राणा, संगीता रावत, यशवंत पंवार, जमुना रावत, प्रदीप चौहान, अनूज सिंह बनाली, जयवीर सिंह रावत, अवनीश शुक्ला, दिनेश कोठियाल, नवदीप, कनिका, अर्चना, अरिंदम, आदर्श, राजेश अग्रवाल, अर्जुन सिंह रावत, उत्तराखंड की प्रथम महिला ई-रिक्शा चालक तथा अतुल सिंह भंडारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, साहित्य प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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