अमेरिका–ईरान तनाव : गैस संकट से रेस्टोरेंट संचालक परेशान, डीजल भट्ठियां बनीं नया विकल्प
राजधानी में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की कमी का असर अब साफ तौर पर बाजारों में दिखने लगा है। एलपीजी की सीमित आपूर्ति के चलते कई मिठाई दुकानों की भट्ठियां ठंडी पड़ गई थीं, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ। हालांकि, हलवाइयों ने इस संकट का समाधान खोजते हुए डीजल से चलने वाली भट्ठियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, राजधानी में करीब 19 हजार से अधिक व्यावसायिक गैस उपभोक्ता हैं। मौजूदा संकट के बीच सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक सिलिंडरों की सप्लाई सीमित कर दी है। शुरुआत में दुकानदारों ने पुराने स्टॉक के सहारे काम चलाया, लेकिन जैसे ही भंडार खत्म हुआ, उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ी।
एक प्रमुख मिठाई ब्रांड ने सबसे पहले राजस्थान से डीजल भट्ठियां मंगाकर प्रयोग शुरू किया। इसके सफल रहने के बाद अब तक शहर की विभिन्न दुकानों में 24 से अधिक डीजल भट्ठियां स्थापित की जा चुकी हैं और उनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
दुकानदारों का कहना है कि डीजल भट्ठियां गैस सिलिंडर की तुलना में अधिक किफायती साबित हो रही हैं। जहां एक डीजल भट्ठी को 10–11 घंटे चलाने में लगभग 20 लीटर डीजल खर्च होता है, वहीं इसी अवधि में दो से अधिक गैस सिलिंडरों की आवश्यकता पड़ती है।
परंपरागत रूप से हलवाई कोयला और लकड़ी की भट्ठियों का भी उपयोग करते रहे हैं, लेकिन इनमें आग को नियंत्रित करना कठिन होता है। एक बार गर्म होने के बाद इन्हें तुरंत बंद नहीं किया जा सकता, जबकि डीजल और गैस भट्ठियां जरूरत के अनुसार आसानी से संचालित की जा सकती हैं।
मिठाई कारोबारी के अनुसार, डीजल भट्ठियां न केवल किफायती हैं, बल्कि अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम प्रदूषणकारी भी हैं। वर्तमान गैस संकट के बीच यह विकल्प कारोबारियों के लिए राहत का माध्यम बनता नजर आ रहा है।
डीजल भट्ठी कैसे काम करती है?
डीजल भट्ठी (Diesel Bhatti) मिठाई दुकानों, बेकरी और बड़े किचन में गैस के विकल्प के रूप में तेजी से इस्तेमाल हो रही है। इसके रेट और काम करने का तरीका इस प्रकार है:
- डीजल भट्ठी एक तरह की बर्नर-आधारित हीटिंग सिस्टम होती है।
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इसमें एक डीजल टैंक होता है, जिसमें ईंधन भरा जाता है।
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एक बर्नर (Burner) डीजल को स्प्रे करके जलाता है।
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एयर ब्लोअर (पंखा) हवा देता है जिससे जलना तेज और नियंत्रित होता है।
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इससे उत्पन्न हीट सीधे कढ़ाई या भट्ठी के अंदर पहुंचती है।
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तापमान को नॉब/कंट्रोल से कम-ज्यादा किया जा सकता है।
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आसान भाषा में: यह गैस चूल्हे की तरह ही है, बस गैस की जगह डीजल जलता है और कंट्रोल थोड़ा ज्यादा एडवांस होता है।
डीजल भट्ठी के रेट (कीमत)
- छोटी भट्ठी (मिठाई दुकान/हलवाई): 25,000 – 50,000।
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मीडियम कमर्शियल भट्ठी: 50,000 – 1,20,000।
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बड़ी इंडस्ट्रियल भट्ठी: 1.2 लाख – 3 लाख+।
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राजस्थान और गुजरात से बनने वाली भट्ठियां बाजार में ज्यादा चल रही हैं।
खर्च कितना आता है?
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10–11 घंटे चलाने में: लगभग 15–20 लीटर डीजल।
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डीजल की कीमत के हिसाब से: 1,500 – 2,000 प्रति दिन (लगभग)।
गैस vs डीजल भट्ठी
फायदे:
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गैस सिलिंडर पर निर्भरता नहीं।
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लंबे समय में सस्ती पड़ सकती है।
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तापमान कंट्रोल आसान।
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लगातार काम के लिए बेहतर।
नुकसान:
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शुरुआत में मशीन खरीदने का खर्च।
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डीजल की गंध/धुआं थोड़ा हो सकता है।
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मेंटेनेंस (सफाई, बर्नर) जरूरी।
किनके लिए बेहतर?
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हलवाई, मिठाई की दुकान।
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बड़े ढाबे/रेस्टोरेंट।
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कैटरिंग बिज़नेस।
